सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में बुलडोजर एक्शन के संदर्भ में एक अहम आदेश दिया है, जिसमें उसने एक ‘लक्ष्मण रेखा’ खींची है, ताकि अवैध निर्माणों को गिराने का कार्य सही तरीके से और मानवीय दृष्टिकोण से किया जा सके। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि अवैध निर्माणों को गिराने के लिए प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है, और इसे केवल कानून के दायरे में ही किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर 15 प्वाइंट वाली एक गाइडलाइन जारी की है,
- प्रारंभिक जांच जरूरी: अवैध निर्माणों को गिराने से पहले संबंधित सरकारी अधिकारी इसकी जांच करेंगे कि यह वास्तव में अवैध है या नहीं।
- सूचना का सार्वजनिक प्रसारण: अवैध निर्माण को गिराने से पहले इसके बारे में उचित समय सीमा में नोटिस जारी करना आवश्यक होगा।
- मानवीय आधार पर कार्रवाई: यदि निर्माण में गरीब या जरूरतमंद लोग रहते हैं, तो उन्हें वैकल्पिक आवास का प्रबंध किया जाएगा।
- सभी पक्षों को सुनवाई का अधिकार: किसी भी निर्माण को गिराने से पहले, संबंधित व्यक्ति या पक्ष को अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा।
- प्रभावित व्यक्तियों के लिए पुनर्वास: यदि अवैध निर्माण के कारण किसी को नुकसान होता है, तो उसे उचित पुनर्वास और मुआवजा दिया जाएगा।
- समय सीमा का पालन: अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई करते समय पूरी प्रक्रिया को एक तय समय सीमा के भीतर ही संपन्न करना होगा।
- अधिकारियों की जिम्मेदारी: बुलडोजर चलाने का आदेश देने वाले अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कार्रवाई केवल कानून के तहत हो रही हो और किसी भी गलत तरीके से नहीं हो रही हो।
- पब्लिक नोटिस: बुलडोजर एक्शन की कार्रवाई से पहले संबंधित क्षेत्र में सार्वजनिक सूचना दी जाएगी, ताकि प्रभावित लोग अपने अधिकारों का उपयोग कर सकें।
- स्थानीय प्रशासन का नियंत्रण: स्थानीय प्रशासन को कार्रवाई की पूरी जिम्मेदारी दी जाएगी, और उन्हें कोर्ट की गाइडलाइनों का पालन करना होगा।
- मानवाधिकारों का संरक्षण: किसी भी अवैध निर्माण को गिराने की प्रक्रिया में मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं किया जाएगा। गरीब और वंचित वर्ग के लोगों के अधिकारों का भी ध्यान रखा जाएगा।
- समानता का सिद्धांत: अवैध निर्माण को गिराने के दौरान किसी खास समुदाय या वर्ग के खिलाफ भेदभाव नहीं किया जाएगा।
- न्यायिक समीक्षा की संभावना: इस प्रक्रिया के दौरान यदि किसी व्यक्ति को न्याय नहीं मिलता है, तो उसे न्यायिक समीक्षा का अधिकार होगा।
- अवधि में बढ़ोतरी की संभावना: यदि कोई निर्माण वर्षों पुराना है और उसमें बसे लोग कई दशकों से रह रहे हैं, तो समय सीमा में बदलाव या विस्तार की संभावना हो सकती है।
- कानूनी प्रावधानों का पालन: सभी कार्रवाई स्थानीय और राज्य के कानूनों के अनुसार की जाएगी, और किसी भी प्रकार का उल्लंघन नहीं किया जाएगा।
- निर्णायक भूमिका में सुप्रीम कोर्ट: यदि इस प्रक्रिया के दौरान कोई गंभीर विवाद उत्पन्न होता है, तो सुप्रीम कोर्ट उस पर अंतिम निर्णय लेने की स्थिति में होगा।
सुप्रीम कोर्ट की ये गाइडलाइंस यह सुनिश्चित करती हैं कि अवैध निर्माणों को गिराने का कार्य एकतरफा और मनमानी तरीके से न हो, बल्कि यह पूरी तरह से कानून, मानवीय दृष्टिकोण और न्याय के सिद्धांतों के तहत हो। इससे प्रभावित व्यक्तियों के अधिकारों का भी सम्मान किया जाएगा, और किसी भी प्रकार का भेदभाव या अन्याय नहीं होगा।
